इंफाल: पूर्वोत्तर भारत के मणिपुर में मंगलवार तड़के भूकंप के तेज झटकों से लोगों में दहशत फैल गई। रिक्टर स्केल पर 5.2 तीव्रता के इस भूकंप का असर सिर्फ मणिपुर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नागालैंड, असम और मेघालय तक धरती कांप उठी। सुबह के वक्त आए इस झटके से लोग घबराकर अपने घरों से बाहर निकल आए।
सुबह 5:59 बजे आया भूकंप, 62 किमी गहराई में था केंद्र
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक, यह भूकंप 21 अप्रैल को सुबह 5:59:33 बजे दर्ज किया गया। भूकंप का केंद्र मणिपुर के कामजोंग क्षेत्र में स्थित था और इसकी गहराई जमीन से करीब 62 किलोमीटर नीचे बताई गई है। फिलहाल इस भूकंप से किसी बड़े जान-माल के नुकसान की तत्काल कोई खबर सामने नहीं आई है।
पूर्वोत्तर के कई राज्यों में महसूस हुए झटके
भूकंप के झटके मणिपुर के अलावा नागालैंड, असम और मेघालय में भी महसूस किए गए। अचानक आए इस झटके से लोग दहशत में आ गए और एहतियातन घरों से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थानों की ओर चले गए।
पहले से तनाव में घिरा मणिपुर, हालात और संवेदनशील
भूकंप ऐसे समय में आया है जब मणिपुर पहले से ही हिंसा और अशांति के दौर से गुजर रहा है। राज्य में हाल के दिनों में बंद, विरोध प्रदर्शन और हिंसक घटनाओं का सिलसिला जारी है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है।
बंद और प्रदर्शनों से जनजीवन अस्त-व्यस्त
अधिकारियों के अनुसार, इस महीने की शुरुआत में दो बच्चों और कुछ अन्य नागरिकों की हत्या के विरोध में विभिन्न संगठनों द्वारा बुलाए गए बंद का व्यापक असर देखने को मिला। मैतेई बहुल घाटी के पांच जिलों के साथ-साथ नागा बहुल उखरुल और सेनापति जिलों में स्कूल, कॉलेज, बाजार और सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह ठप रहे, जिससे लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
इंफाल में विरोध प्रदर्शन, पांच दिन के बंद का ऐलान
राजधानी इंफाल के उरीपोक और नागरम सहित कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन हुए। महिलाओं के समूह मीरा पैबिस ने बिष्णुपुर जिले के ट्रोंगलाओबी में 7 अप्रैल को हुए बम हमले के विरोध में पांच दिन के बंद का आह्वान किया है। इस हमले में एक पांच वर्षीय बच्चे और उसकी छह महीने की बहन की मौत हो गई थी, जबकि उनकी मां घायल हो गई थी।
इस घटना के बाद भड़के विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई और करीब 30 लोग घायल हो गए। बताया गया कि एक भीड़ ने पास के सीआरपीएफ कैंप पर हमला करने की कोशिश की, जिसके बाद सुरक्षा बलों को गोलीबारी करनी पड़ी।
